GANDHI IN ACTION network

the Spirit of Mahatma Gandhi lives through every nonviolent action

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

स्त्री न केवल अपनी ही रक्षा कर सकेगी, बल्कि दूसरों का भी कर लेगी

जब किसी स्त्री पर आक्रमण हो तब वह अहिंसा हिंसा का विचार करने के लिए ठहर नहीं सकती. उसका प्रथम धर्म आत्मरक्षा का है. अपनी लाज बचाने के लिए जो भी उपाय सूझे, वही काम में लेने की उसे स्वतंत्रता है. उसे भगवान ने नख और दांत दिये हैं. उसे अपनी पूरी शक्ति के साथ उसका उपयोग करना चाहिए और जरूरत हो तो इस प्रयत्न में मर जाना चाहिए. जिस पुरुष या स्त्री ने सारा डर छोड़ दिया है, वह अपने प्राण देकर न केवल अपनी ही रक्षा कर सकेगी, बल्कि दूसरों का भी कर लेगी.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

पुरुष को अपनी शक्ति का प्रयोग करके भी स्त्री को बचाने का प्रयत्न करना चाहिए- महात्मा गांधी

 

इस स्थिति में पुरुष को पुलिस की सहायता के लिए नहीं दौड़ना चाहिए और न रेलगाड़ी में खतरे की जंजीर खीच कर संतोष मान लेना चाहिए. यदि वह अहिंसा का पालन कर सके, तो उसका पालन करते हुए मर जायेगा और इस प्रकार खतरे में पड़ी हुर्इ स्त्री को बचा लेगा. यदि अहिंसा में उसका विश्वास नहीं है या वह उसका पालन नहीं कर सकता, तो उसमें जो भी शक्ति है, उसका पूरा उपयोग करके उसे स्त्री को बचाने का प्रयत्न करना चाहिए.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

 

मेरे जैसे लोग स्त्री को बचाने के लिए आगे आयें- महात्मा गांधी

 

यदि मैं या मेरे जैसे लोग बीच में पड़ कर हिंसा या अहिंसा से किसी भी तरह अपने प्राण दे देंगे, तो हम बलात्कार का शिकार बनी हुर्इ स्त्री को अवश्य बचा लेंगे और कम से कम उसके अपमान के जीवित साक्षी तो नहीं रहेंगे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

इस दशा में अपनी हत्या का चुनाव करना चाहिए

जब अपनी हत्या या आक्रमणकारी की हत्या के बीच चुनाव करने प्रश्न हो, तो मेरे मन में कोर्इ शंका नहीं है कि अपनी हत्या का चुनाव करना चाहिए.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

 

पुलिस और सेना का उपयोग रचनात्मक कार्यों में करना चाहिए- महात्मा गांधी

 

नये मंत्रियों को यह निश्चय कर लेना चाहिए कि वे कभी भी ब्रिटिश सेनाओं का उपयोग नहीं करेंगे, चाहे उनका रंग कैसा भी हो और उनकी सिखायी हुर्इ पुलिस का भी उपयोग नहीं करेंगे. सेना और पुलिस हमारे शत्रु नहीं हैं. परंतु अब तक लोगों को सहायता देने के बजाय उन्हें विदेशी जुये के नीचे रहने के लिए उस पुलिस और सेना का उपयोग किया गया है. अब उन्हें रचनात्मक कार्यों में  लगाना चाहिए और दोनों का उपयोग इन कामों में हो सकता है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

 

पुलिस और सेना के कर्तव्य- महात्मा गांधी

 

जिस देश की प्रजा अहिंसा की अद्धितीय वीरता सीखी न हो, वहां पुलिस का काम चोर डाकुओं से नागरिकों की रक्षा करना है और सेना का काम सामान्यतः विदेशी आक्रमणकारी से देश की रक्षा करना है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

गांव वाले पुलिस का संरक्षण नहीं चाहते- महात्मा गांधी

 

सात लाख गांवों में न तो पुलिस का संरक्षण मिलता है और न वे पुलिस का संरक्षण चाहते हैं. गांव में अकेले पटेल का बड़ा आतंक होता है. गांवों पर उसका प्रभुत्व होता है और वह इसलिए रखा जाता है कि मां-बाप सरकार का लगान वसूल करने में पटवारी की मदद करे. मैं नहीं जानता कि पुलिस के जवानों ने मनुष्य और हिंस्र पशुओं के आक्रमण से गांव वालों की सम्पत्ति और मवेशी की रक्षा करने में कभी मदद दी हो.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

 

हम खतरे में भी अवसर ढूढ़ रहे हैं- महात्मा गांधी

 

यदि संविधान सभा निष्फल हो जाती है, तो इसका कारण यह नहीं होगा कि अंग्रेज ही हर बार दुष्टता करते हैं. बल्कि यह होगा कि हम लोग मूर्ख हैं अथवा मैं तो यह कहूंगा कि हम दुष्ट हैं. हम अपने इतिहास के एक संकट काल में से गुजर रहे हैं, चारो ओर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. परंतु हम खतरे को अपना अवसर बना लेंगे, यदि हम सत्याग्रह की शक्ति पहचान लें, क्‍योंकि इस पृथ्वी पर सत्याग्रह से शक्तिशाली कोर्इ अन्य वस्तु नहीं है.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

वह मुसलमान किस राज्य का वफादार नागरिक होगा? – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

वह मुसलमान किस राज्य का वफादार नागरिक होगा ? क्‍या उस राज्य का जिसके भीतर वह रहता है और चलता फिरता है और जो मुस्लिम राज्य न हों- पाकिस्तान के भीतर न होने के कारण- अथवा उस दूरवर्ती मुस्लिम राज्य का जिसके साथ उसका इसके सिवा कोर्इ सम्बंध न हो कि उसमें रहने वाले अधिकांश लोग उसी धर्म को मानते हैं, जिसे वह मानता है?

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

 

इस्लाम सम्पूर्ण मानव जाति की एकता और भार्इचारे का हिमायती है – महात्मा गांधी

 

मुझे पाकिस्तान की मांग मानने में कोर्इ संकोच नहीं होगा, यदि मुझे विश्वास धरा दिया जाये कि वह उचित है अथवा इस्लाम के लिए हितकारी है. परंतु मुझे दृढ़ विश्वास है कि मुस्लिम लीग द्वारा पेश की गयी पाकिस्तान की मांग इस्लाम के विरुद्ध है और मुझे उसे पापपूर्ण कहने में संकोच नहीं है. इस्लाम सम्पूर्ण मानव जाति की एकता और भार्इचारे का हिमायती है, न कि मानव परिवार की एकता को छिन्न- भिन्न करने का. इसलिए जो लोग भारत को परस्पर लड़ने- झगड़ने समूहों में बांट देना चाहते हैं. वे भारत और इस्लाम दोनों के शत्रु हैं. वे चाहें तो मेरे टुकड़े-टुकड़े कर सकते हैं, परंतु मुझसे कोर्इ ऐसी बात नहीं मनवा सकते हैं, जिसे मैं अनुचित और गलत समझता हूं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

क्रोध और द्वेष तथा दूसरे सब हीन आवेगों पर विजय पाने की शक्ति प्रार्थना से आती है – महात्मा गांधी

 

र्इश्वर को किसी भी नाम से पुकारा जा सकता है. जब तक कि उसका अर्थ जीवन का सजीव धर्म है. दूसरे शब्दों में नियम और नियम का निर्माता र्इश्वर एक ही है. यह साहस इस विश्वास के साथ पैदा होता है कि र्इश्वर सबके हृदयों में विराजमान है और र्इश्वर की उपस्थिति में कोर्इ भय नहीं होना चाहिए. र्इश्वर की सर्वव्यापकता का ज्ञान अर्थ विरोधी कहलाने वाले लोगों के प्राणों के लिए भी आदर होता है. क्रोध और द्वेष तथा दूसरे सब हीन आवेगों पर विजय पाने की शक्ति प्रार्थना से आती है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

सत्याग्रह का शब्दार्थ है सत्य पर अटल रहना – महात्मा गांधी

 

सत्याग्रह का शब्दार्थ है सत्य पर अटल रहना. इसलिए सत्याग्रह की शक्ति, आत्मबल अथवा सत्यबल हमारे भीतर बसे र्इश्वर की शक्ति है. र्इश्वर व्यक्ति नहीं है. वह सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान परमात्मा है. जो मनुष्य उसे अपने हृदय में स्थापित कर लेता है, उसे ऐसी अद्‍भुत शक्ति प्राप्त हो जाती है, जो परिणाम में तो भाप और बिजली जैसी भौतिक शक्तियों के ही समान है, परंतु उससे कहीं अधिक सूक्ष्म है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मेरा धर्म- महात्मा गांधी

 

मैं कैसे रहता हूं, कैसे खाता हूं, कैसे बैठता हूं, कैसे बोलता हूं और सामान्यतः कैसे व्यवहार करता हूं. इन सब बातों का कुल जोड़ ही मेरा धर्म है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

नोआखली एवं सुसज्ज्ति गुंडे

घातक शस्त्रों से सुसज्ज्ति गुंडे कड़ा पहरा लगा रहे थे. इस तार में यह भी उल्लेख था कि इस भयंकर मारकाट, आगजनी और लूटपाट के पीछे योजनाबद्ध संगठन था. नोआखली जिले में रामगंज, लक्ष्मीपुर, बेगमगंज और सेनबाग थानों में लगभग एक गांव गुंडों से घिरे हुए रहे, जिनमें नब्बे हजार की हिन्दू आबादी थी. यही हाल तिपरा जिले के चांदपुर और फरीदगंज थानों में लगभग चालीस हजार की हिन्दी वाले कोर्इ सत्तर गांवों का हुआ.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

नोआखली पर दि स्टेटमैन की टिप्पणी

अठारह अक्‍टूबर को दि स्टेटमैन ने अपनी सम्पादकीय टिप्पणी में लिखा कि यह अजीब बात लगती है कि प्रांत के एक भाग में इस प्रकार के भयंकर आपत्ति का खतरा हफ्तों से लोगों के सिर पर मंडरा रहा था और वहां का प्रशासनिक तंत्र टूटने के प्रमाण भी मिलने लगे थे, फिर भी उस भयंकर आपत्ति के स्थान पर पहुंचने कीी गवर्नर या मुख्यमंत्री की कोर्इ प्रवृत्ति अभी तक दिखायी नहीं देती. एक दार्जिलिंग में बैठै हुए हैं, दूसरे उनसे मिलने के लिए दार्जिलिंग गये हैं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

नोआखली के बारे में इंस्पेक्‍टर जनरल का बयान

इंस्पेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस मि. टेलर के अनुसार- बंदूकों और तरह तरह के दूसरे हथियारों से सुसज्जित थे तथा अभी तक कानून की अवहेलना करते थे और पुलिस तथा सेना का सामना करने में उन्हें डर नहीं लगता था. जैसे जैसे भीड़ आगे बढ़ती थी, वह तार काटती जाती थी, पुलों को तोड़ती जाती थी, नहरों में बांध लगा देती थी, सड़कों को सुनसान पहुंचा कर वहां रुकावटें खड़ी कर देती थी और इस प्रकार जिन स्थानों पर आक्रमण हुआ था, वहां आवागमन को असम्भव बना देती थी.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

बोधात्मक भाषा विज्ञान

 

यह भाषा विज्ञान की एक विशिष्ट इकार्इ है. इसका सम्बंध उन लोगों से है, जो भाषिक कार्य-कलाप में संलग्न होते हैं. यानी जो साहित्य सृजन या अन्य प्रकार के सृजन कार्य में संलग्न रहते हैं. या ऐसे लोग जो लोगों के बीच में जाकर बौद्धिक बातचीत करते हैं. इसके लिए वे उससे सम्बंधित सभी सूचनायें इकट्ठा करते हैं. उससे सम्बंधित सांस्कृतिक उपाख्यानों को संदर्भित करते हुए उपयोगी बनाते हैं. इसमें सृजनात्मक प्रतिचित्रण, विस्थापन एवं विस्तारण होता है. इस तरह बोधात्मक भाषा विज्ञान एवं उसका अध्ययन बहुत ही उपयोगी है.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

वीर सावरकर ने महात्मा गांधी से पहले विदेशी कपड़ों की होली जलार्इ

 

वीर सावरकर के नाम से प्रसिद्ध विनायक दामोदर सावरकर का जन्म अट्ठार्इस मर्इ अठारह सौ तिरासी को बम्बर्इ प्रेसीडेंसी में हुआ. सावरकर एक प्रखर राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं. हिन्दुत्व के पोषक के रूप में भी इन्हें ख्याति प्राप्त है. इसके अलावा ये प्रखर चिंतक, लेखक, कवि, ओजस्वी वक्‍ता भी थे. इन्होंने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास लिखकर पूरे विश्व के सामने अंग्रेजों को बेनकाब कर दिया. जिसकी सजा भी इन्हें भुगतनी पड़ी. ये ऐसे एकमात्र नेता हैं, जिन्हें दो बार आजीवन कारावास की सजा मिली. उन्नीस सौ चार में इन्होंने अभिनव भारत नामक एक क्रांतिकारी संगठन बनाया. उन्नीस सौ पांच में बंगाल का प्रखर विरोध वीर सावरकर ने किया और पूना में विदेशी कपड़ों की होली जलाकर इसका विरोध किया. इस प्रकार महात्मा गांधी से पहले वीर सावरकर ने विदेशी कपड़ों की होली जलायी. जबकि विदेशी कपड़ों की होली महात्मा गांधी के कारण प्रसिद्ध हुर्इ.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

लार्ड बेवेल एवं महात्मा गांधी में बातचीत

 

छब्बीस सितम्बर उन्नीस सौ छियालिस को लार्ड बेवेल वाइसराय एवं महात्मा गांधी में बातचीत हुर्इ. वाइसरायः लीग को किसी न किसी तरह अंदर लेना चाहिए.

गांधीजीः कांग्रेस तो तैयार है, यदि लीग के लोग सीधे ढंग से आने के लिए रजामंद हों. जिन्ना पंडित नेहरु से मिले और उनसे सम्मानपूर्ण समझौता कर लें. वह तो एक महान दिन होगा, जब कांग्रेस और लीग आपस में समझौता करने के बाद अंतरिम सरकार में एक साथ हो जायेगी. परंतु उन्हें मन कोर्इ बात छिपाकर नहीं रखनी चाहिए और न असहयोग करने तथा लड़ने के लिए सरकार में आना चाहिए.

वाइसरायः इसमें एकमात्र रुकावट अंतरिम सरकार में किसी राष्ट्रीय राष्ट्रवादी मुसलमान को मनोनीत करने का अधिकार है. परंतु इस हकीकत को देखते हुए कि इस मामले पर जिन्ना ने जिद पकड़ ली है, उस अधिकार को छोड़ देने में क्‍या हानि है?

गांधीजीः मनुष्य अधिकार तो छोड़ सकता है, परंतु कर्तव्य नहीं छोड़ा जा सकता

वाइसरायः लेकिन अगर लीग अंदर आने से इंकार कर देती है, तो संविधान सभा का क्‍या होगा?

गांधीजीः मैं यह स्वीकार करता हूं कि उस सूरत में संविधान सभा उचित रूप में मिल नहीं सकती. लेकिन मैं यह स्पष्ट कर देता हूं कि इस मामले में मैं अपने सिवा और किसी का प्रतिनिधि नहीं हूं.

वाइसरायः इस विचार को हम जरा और आगे बढ़ायें. यदि संविधान सभा नहीं बुलार्इ जाती तो फिर क्‍या होगा?

गांधीजीः राष्ट्रीय अंतरिम सरकार जैसे अभी प्रशासन चला रही है, वैसे ही वह आगे चलाती रहेगी. यदि आप उसे चालू नहीं करने देंगे, तो आपकी नेक नियति पर शंका होगी.

वाइसरायः ऐसा तो हम कैसे कर सकते हैं?

गांधीजीः तब क्‍या आप इस बहाने से सत्ता अपने ही हाथ में रखना चाहते हैं? यदि आप ऐसा करेंगे, तो सारा संसार आपकी निंदा करेगा. आप इतना ही आग्रह कर सकते हैं कि अंतरिम सरकार में मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि होने चाहिए. कांग्रेस वैसा करने के लिए तैयार है.

वाइसरायः इसके लिए मुझे ब्रिटिश मंत्रिमंडल से आदेश लेने की जरूरत होगी. मैं तो उसके आदेशों के अनुसार ही काम कर सकता हूं. मैं स्वीकार करता हूं कि मेरी सहानुभूति लीग के साथ है. लीग को अंतरिम सरकार में लाने का प्रयत्न जारी रहेगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

जिन्ना की नौ सूत्रीय मांग

 

चार अक्‍टूबर उन्नीस सौ छियालिस को जिन्ना ने अपनी नौ मांगों की नकल वाइसराय ने पं. नेहरु को दिया, जिसके आधार पर मुस्लिम लीग अंतरिम सरकार में सम्मिलित हो सकती थी. जिसमें से मुख्य  मांगें निम्नलिखित हैं-

  1. मुस्लिम लीग को यह तो मान्य है कि कांग्रेस का छठा मनोनीत सदस्य चौदर सदस्यों की अंतरिम सरकार में परिगणित जातियों का कोर्इ प्रतिनिधि हो. परंतु उनका कहना है कि इस बारे में अंतिम दायित्व गवर्नर जनरल का है और यह नहीं मान लेना चाहिए कि परिगणित जाति के प्रतिनिधि का जो चुनाव हुआ है, उसे मुस्लिम लीग ने स्वीकार कर लिया है. इस पर लार्ड बेवेल की टिप्पणी यह थीः आपका कहना मेरे ध्यान में है और मैं स्वीकार करता हूं कि अंतिम दायित्व मेरा है.
  2. मुस्लिम लीग ने यह मांग की कि उपाध्यक्ष दोनों बड़ी जातियों में से बारी बारी से अथवा विकल्प के रूप में लिया जाये. वाइसराय ने यह प्रस्ताव रखा कि इसकी व्यवहारिक कठिनाइयों को देखते हुए इसे बजाय वे यह व्यवस्था कर देंगे कि गवर्नर जनरल और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में किसी मुस्लिम लीगी सदस्य को मंत्रिमंडल की अध्यक्षता करने के लिए मनोनीत किया जाये. उन्होंने यह भी कहा कि वे मंत्रिमंडल की समन्वय समिति के उपसभापति के रूप में किसी मुस्लिम लीगी सदस्य को मनोनीत कर देंगे. जो कि एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पद है. मैं इस समिति का सभापति हूं और भूतकाल में लगभग हमेशा मैंने उसकी अध्यक्षता की है, परंतु अब विशेष अवसरों पर ही मैं उसकी अध्यक्षता कर सकता हूं.
  3. मुस्लिम लीग ने इस अधिकार का दावा किया कि सिख भारतीय र्इसार्इ और पारसी आदि अल्पसंख्यक जातियों के प्रतिनिधियों के चुनाव में लीग से सलाह ली जाये और वाइसराय इस ने सम्बंध में यह आश्वासन दिया है कि इन स्थानों में से कोर्इ स्थान खाली होगा, तब उसे भरने से पहले दोनों बड़े दलों से परामर्श किया जायेगा.
  4. मुस्लिम लीग में अंतरिम सरकार में तमाम बड़े साम्प्रदायिक प्रश्नों के निर्णय पर निषेधाधिकार का दावा किया है. इस पर वाइसराय ने यह जवाब दिया था कि मिश्र सरकार या तो आपसी समझौते की प्रक्रिया द्वारा काम करती है या बिलकुल काम नहीं करती. इसलिए सारे मतभेद मित्रता पूर्ण चर्चायें करके मंत्रिमंडल की बैठकों से पहले ही दूर कर लिये जायें.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

वीर यह, उसका विधान विवेक है,

 

 

लार्ड बेवल से महात्मा गांधी की पहली मुलाकात शिमला में हुर्इ. अपनी पहली मुलाकात में गांधी जी ने उनके सामने यह आशा प्रकट की थी कि सैनिक वाइसराय में उन्हें सुखी योद्धा के दर्शन होंगे. वर्ड्सवर्थ की वे पंक्तियां इस प्रकार  है-

 

वीर यह, उसका विधान विवेक है,

मित्र सा जिसका लिए आधार दृढ़

क्‍योंकि जब बचने जघन्य अनिष्ट से,

मनुज धरता छोर अन्य अनिष्ट का,

और जो कुछ सगुण, सुकृत कि भव्य है,

क्‍वचित ही होता प्रतिष्ठित सत्य पर,

हर विजय है निहित मानव की सदा,

स्वयं अपने ही सु-आत्मचरित्र में,

जान इतना मर्म भर यह वीरवर,

सत्य पर शिव की प्रतिष्ठा कर रहा है.

 

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

आप कांग्रेस को मिश्र सरकार बनाने दें- महात्मा गांधी

 

महात्मा गांधी ने अपने व्यक्तिगत पत्र में लिखा कि आप अपने जीवन का सबसे कठिन कार्य हाथ में ले रहे हैं. मुझे तो ऐसा दिखता है कि कैबिनेट मिशन आपके साथ खेल रहा है. अगर आप में साहस हो तो आप वही करेंगे, जो मैंने आरम्भ में ही सुझाया था. आप रोटी को भी रख लें और उसे खा भी लें, ये दोनों बातें एक साथ नहीं कर सकेंगे. आपको मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों में से एक का चुनाव करना पड़ेगा. दोनों संस्थायें आपकी ही कृतियां हैं. कभी कांग्रेस को कभी लीग को और फिर कांग्रेस को मनाने का प्रयत्न करने से आप अपने को थका लेंगे. परंतु इससे काम नहीं बनेगा. आप या तो जो सही है, उस पर कायम रहिये अथवा ब्रिटिश नीति की दृष्टि से आपको जो ठीक लगे वह कीजिये. दोनों ही सूरत में बहादुरी की जरूरत है. इतना ही है कि आप कार्यक्रम पर स्थिर रहिये. आकाश टूट पड़े तो भी अपनी तारीखों पर अटल रहिये. सोलह जून को आप चले जाइये. भले ही आप कांग्रेस को मिश्र सरकार बनाने दें या लीग को बनाने दें. अगर आपका यह विचार हो कि आपकी पैदा की हुर्इ दोनों संस्थाओं से संचित ब्रिटिश सयानापन अधिक ज्ञानवान है, तो मुझे और कुछ नहीं कहना है. परंतु मेरी कल्पना यह है कि आप उस ढांचे में ढले नहीं.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

भारत में ब्रिटिश सत्ता की चार भुजायें हैं- महात्मा गांधी

 

भारत में ब्रिटिश सत्ता की चार भुजायें हैं- सरकारी सेना, सरकारी मुल्की कर्मचारी, गैर सरकारी मुल्की कर्मचारी और गैर सरकारी सेना. इसलिए जब शासक वर्ग यह कहता है कि गैर सरकारी यूरोपियन उसके नियंत्रण में नहीं है, तो यह बेहूदा बात मालूम होती है. सरकारी कर्मचारियों का अस्तित्व गैर सरकारी लोगों के लिए ही है. अगर गैर सरकारी लोग न हों, तो सरकारी कर्मचारियों के लोगों का कोर्इ काम ही नहीं रहेगा. ब्रिटिश झंडा ब्रिटिश व्यापार के पीछे पीछे यहां आया. सारा भारत ब्रिटिश सेना के आधिपत्य के नीचे हैं. तिनके से ही पता चलता है कि हवा किस तरफ बढ़ रही है. यूरोपियन एसोसिएशन का यह अविवेकपूर्ण कृत्य है. मिशन के कार्य की वास्तविकता में रहे, विश्वास को हिला देने वाला सबसे बड़ा अशांति कारक तत्व है. क्‍या ब्रिटिश बंदूकों की रक्षा में रहने वाले भारत की आम जनता के सद्‍भाव पर ही सुरक्षित नहीं समझ सकते. उन्होंने अपने हाल के वक्‍तव्य में यहां तक कहने की मूर्खता दिखायी है कि वे स्वयं अपने लिये तो मत नहीं देंगे. परंतु भारतीय चमड़ी वाले अपने पिट्ठुओं को चुनवाने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. सम्भव हुआ तो यह चालाकी वे बार बार करेंगे, जिससे वे अब तक मुट्ठीभर होते हुए भी भारत के करोड़ों मूक लोगों का गला घोट सके हैं. यह पीड़ा कब तक बनी रहेगी.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

अपने पांच मुसलमानों के हिस्से के सिवा मुस्लिम लीग और किसी भी नाम के चुनाव में कुछ नहीं कह सकती है – महात्मा गांधी

 

वाइसराय के नाम लिखवाये अपने पत्र का मसौदा इस प्रकार है-

  1. मुस्लिम लीग चूंकि मानी हुर्इ मुस्लिम संस्था है, इसलिए वह अपनी सूची में किसी गैर मुस्लिम प्रतिनिधि को सम्मिलित नहीं कर सकती.
  2. कांग्रेस के राष्ट्रवादी संस्था होने के नाते अपनी सूची में किसी राष्ट्रवादी मुसलमानों को सम्मिलित करने का अधिकार उसे होना ही चाहिए.
  3. अपने पांच मुसलमानों के हिस्से के सिवा मुस्लिम लीग और किसी भी नाम के चुनाव में कुछ नहीं कह सकती है. इसका अर्थ यह होगा कि अल्पसंख्यकों को दिये गये स्थानों में से कोर्इ स्थान खाली हो, तो उसे भरने के लिए नाम चुनने का अधिकार कांग्रेस को होगा. क्‍योंकि वह अपने सेवा के अधिकार से सब वर्गों को प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है.
  4. व्यवहार में अंतरिम सरकार को विधान सभा के चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जिम्मेदार माना जाना चाहिए.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

संविधान सभा को जन्म देने वाले ही उसकी हत्या कर रहे हैं- महात्मा गांधी

विष की एक ही बूंद से अमृत का पूरा घड़ा घातक विष में बदल सकता है. मुझे यह देखकर दुख होता है कि जिन लोगों ने संविधान सभा को जन्म दिया, उन्हीं के मातहत काम करने वाले लोग उसकी हत्या कर रहे हैं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

सत्याग्रही तो पराजय जानता ही नहीं – महात्मा गांधी

 

मैं यह स्वीकार करने को तैयार हूं कि प्रस्तावित संविधान जनता की पार्लियामेंट या संसद नहीं है. उसमें अनेक दोष हैं. परंतु आप सब अनुभवी और महारथी योद्धा है. सैनिक खतरे से कभी नहीं डरता. खतरे में उसको आनंद आता है. यदि प्रस्तावित संविधान सभा में त्रुटियां हैं, तो उन्हें दूर कराना आपका काम है. यह तो लड़ार्इ की चुनौती होनी चाहिए न कि इंकार का एक कारण. मुझे आश्चर्य होता है कि श्री जयप्रकाशनारायण ने कल यहां कहा कि प्रस्तावित संविधान सभा में भाग लेना खतरनाक होगा और इसलिए कार्यसमिति का प्रस्ताव अस्वीकार कर देना चाहिए. जय प्रकाश जैसे परखे हुए योद्धास के मुंह से ऐसी हार की भाषा सुनने के लिए मैं तैयार नहीं था. सत्याग्रही तो पराजय जानता ही नहीं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

सीये हुए होठों का मौन अच्छा नहीं होता है- महात्मा गांधी

सामूहिक मौन प्रार्थना में र्इश्वर हमसे अवश्य बोलता है. और हम जीवन के सामान्य कार्यों में उसकी इच्छा समझ सकते हैं. साप्ताहिक मौन दिवस के पालन पर आधारित गांधीजी का अनुभव भी इससे मिलता था. यदि हम उस शांत और मंद आवाज को सुनना चाहते हों, जो हमारे भीतर सदा बोलती है, तो हमारे लगातार बोलते रहने से वह हमें सुनार्इ देगी. मौन वृत्ति में आत्मा को अधिक स्पष्ट प्रकाशयुक्‍त मार्ग मिल जाता है और जो वस्तु भ्रामक और धोखे में डालने वाली होती है, वह स्फटिक के समान स्पष्ट हो जाती है. सीये हुए होठों का मौन अच्छा नहीं होता है. जीभ काट लेने से भी यही परिणाम निकल सकता है. परंतु वह मौन नहीं कहा जायेगा. सच्चा मौनी वह है, जो बोलने की शक्ति होते हुए भी कोर्इ व्यर्थ का शब्द नहीं बोलता.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

जिन लोगों पर मुकदमा चल रहा है, उनकी भारत पूजा करता है- महात्मा गांधी

इस भय से मैं यह पत्र कांपते हुए लिख रहा हूं कि कहीं मैं अपनी सीमा का उल्लंघन तो नहीं कर रहा हूं. श्री सुभाषबाबू द्वारा खड़ी गयी सेना के सैनिकों पर चल रहे मुकदमें की कार्रवार्इ को मैं ध्यान से देख रहा हूं. यद्यपि शस्त्र बल से किये जाने वाले किसी संरक्षण से मैं सहमत नहीं हो सकता, फिर भी शस्त्रधारी व्यक्तियों द्वारा अकसर जिस वीरता और देशभक्ति का परिचय दिया जाता है, उसके प्रति मैं अंधा नहीं हूं. जिन लोगों पर मुकदमा चल रहा है, उनकी भारत पूजा करता है, निःसंदेह सरकार के पास जबरदस्त शक्ति है. परंतु यदि सर्वव्यापी भारतीय विरोध के बावजूद उस शक्ति का उपयोग किया गया, उनके साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए. मैं तो इतना ही कहूंगा कि जो कुछ किया जा रहा है, वह उचित नहीं है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

अहिंसक मनुष्य होने के नाते मैं किसी को न्यायपूर्ण अधिकारों से वंचित करना पसंद नहीं करुंगा- महात्मा गांधी

जमीदारों का एक प्रतिनिधि जो भंगी वस्ती में मिलने आया था, उसकी शंकाओं का समाधान करते हुए महात्मा गांधी ने कहा कि जब भारत स्वाधीन हो जायेगा तो आप उतने ही स्वतंत्र होंगे, उदाहरण के लिए जितना कोर्इ भंगी होगा. अहिंसक मनुष्य होने के नाते मैं किसी को न्यायपूर्ण अधिकारों से वंचित करना पसंद नहीं करुंगा. परंतु अंग्रेजी राज्य में कुछ असाधारण विशेषाधिकार हथियाये हुए ही थे. ऐसे अधिकारी को नहीं रहने दिया जायेगा. जब एक प्रतिनिधि ने पूछा कि बहुत से जमींदार अंग्रेजों के आने से पहले भारत में मौजूद थे, क्‍या उनको रहने दिया जायेगा. गांधीजी ने उत्तर दिया जो वस्तु नैतिक मूल्यों के साथ सुसंगत है, उसे मौजूद रहने का अधिकार है. इसके विपरीत बुरार्इ को केवल इस कारण से टिके रहने का अधिकार नहीं है कि वह बहुत समय से इस कारण उन्हें रहने का अधिकार नहीं है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

नैतिक स्वाधीनता का अर्थ- महात्मा गांधी

नैतिक स्वाधीनता का अर्थ यह था कि सशस्त्र सेना की रक्षा से छुटकारा मिल जाये. इस स्वतंत्रता में ब्रिटिश सेना की जगह राष्ट्रीय सेना के लिए भी कोर्इ अवकाश नहीं हो सकता. जिस देश पर उसकी राष्ट्रीय सेना का शासन हो, वह कभी नैतिक दृष्टि से स्वतंत्र नहीं हो सकता है और इसलिए उस देश का सबससे कमजोर नागरिक कभी अपनी सम्पूर्ण नैतिक ऊंचार्इ तक नहीं उठ सकता.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

हम ऐसे देश के वासी हैं

 

महात्मा गांधी ने भंगी बस्ती में एक प्रार्थना सभा में एक हिन्दी का भजन गया था. उसमें गांधीजी ने अपने स्वतंत्र भारत का चित्र उसके महत्त्वपूर्ण अंशों में मूर्त रूप लेता दिखार्इ दिया. उस पर वे मोहित हो गये और उसका अंग्रेजी अनुवाद करके उन्होंने लार्ड पेथिक लारेंस के पास भिजवा दिया वह भजन इस प्रकार था-

 

हम ऐसे देश के वासी हैं,

जहाँ शोक नहीं और आह नहीं.

जहाँ मोह नहीं और ताप नहीं,

जहाँ भरम नहीं और चाह नहीं..

 

जहाँ प्रेम की गंगा बहती है

सब सृष्टि आनंदित रहती है

जो है या एक चहेती है

दिन रात नहीं सम्मान नहीं

 

सब को है सब कुछ मिला हुआ

यहाँ सब सौदा है तुला हुआ

एक साँचे मे सब ढला हुआ

कुछ कमी नहीं परवाह नहीं

 

जहाँ स्वारथ के नाम रूप नहीं

कोई ख़ास नहीं कोई आम नहीं

कोई करता और ग़ुलाम नहीं

जहाँ दीप्ति रहती पर दाह नहीं

 

तेरे अंतर मे वह है,

वो स्वराज स्वदेशी है.

तेरे अंतर मांह निलय,

जय, जय, जय, जय!

जय चाहने से मिलती है.

 

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

महात्मा गांधी की 77वीं वर्षगांठ पर 77 हजार गुंडिया भेट

 

 

जिस स्वराज्य में साधारण मनुष्यों को अपने मूल अधिकार फिर प्राप्त होंगे, चरखे में उन्हें ताल, संगीत, काव्य, साहस और शौर्य और आध्यात्मिक संतोष भी मिलता था. कुछ दिन बाद कनु गांधी ने भंगी बस्ती में कतार्इ और उससे सम्बंधित दूसरी प्रक्रियायें सिखाने के लिए ग्यारह दिन का जो वर्ग चलाया गया था, उससे गांधीजी को जितना संतोष हुआ, उतना जनता को किसी और बात से नहीं हुआ. एक सौ दस व्यक्ति कतार्इ की अंतिम परीक्षा में बैठे थे. आमतौर पर नवागुंतकों ने एक सप्ताह के भीतर इस कला को सीख लिया. कतार्इ की सारी प्रक्रियाओं की प्रदर्शनी का उद्‍घाटन समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने किया. इस समारोह की मुख्य घटना यह थी कि गांधीजी को उनकी 77वीं वर्षगांठ पर भेंट स्वरूप देने के लिए सारे देश से सूत की 77 हजार गुंडिया इकट्ठी की गयी थीं.

 

 

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

तो गरदन उतारने का काम अपने से शुरू कर दो- दादा धर्माधिकारी

 

लड़के लड़कियों का विद्यार्थी जीवन जब तक ब्रह्चर्य की बुनियाद पर आधार नहीं रखेगा, तब तक उसमें पवित्रता नहीं आ सकेगी. इसलिए विद्यार्थी जीवन में ब्रहमचर्य आश्रम विद्यार्थी जीवन के लिए अत्यावश्यक है.

एक बार कालेज के एक छात्र ने मुझसे पूछा कि हमें यह तो बताइये कि हमारी बहन रास्ते से जा रही है और कोर्इ गुंडा उसे छेड़ रहा है, तो हमें क्‍या हम अहिंसक रह जायें? चुप रह जायें?

मैंने कहा कि चुप क्‍यों रहो? पर यह तो बताओ कि आज तक ऐसे कितने मौके आये?

उसने कहा कि मौके नहीं आये, लेकिन आ सकते हैं.

मैंने कहा कि ठीक है, अगर कभी मौका आये, तो तुम क्‍या चाहते हो?

वह बोला, हम चुप कैसे बैठ सकते हो?

मैंने कहा, हां, चुप मत बैठो.

बापू जी उस समय जीवित थे. बापू के आधार पर मैंने उसे कुछ समझाया और कहा, पहले से ऐसा विचार मत करो. लेकिन अगर देखो भी कि ऐसा हो रहा है, तो उसकी गर्दन उतार लो. मैं गांधी से तुम्हारे लिए अहिंसा का प्रमाण-पत्र ला दूंगा.

 वह बहुत खुश हुआ कि गांधीवाला कहा है कि गांधी जी से भी अहिंसा का सर्टीफिकेट ला दूंगा.

मैंने उससे कहा कि पर एक शर्त है.

बोला वह क्‍या?

यही कि जिन लड़कियों के साथ तुम स्कूल में उठते-बैठते हो, खेलते-कूदते हो, पढ़ते-लिखते हो, उनकी तरफ तुम्हारी देखने की दृष्टि कैसी है? और उस दृष्टि में यदि फर्क है, तो गरदन उतारने के कार्यक्रम का आरम्भ अपने से कर दो.

बस इतनी शर्त उसने सुनी और वह बैठ गया.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

दो मुँही राजनीति

 

विभीषण राम से कहने लगा कि रावण के पास तो रथ है और आपके पास तो रथ नहीं है. राम कहता है कि जेहि जय होय सो स्यंदन आना. मेरा जो रथ है, वह अलग तरह का है. रावण के बीस बाण और राम का एक ही बाण. उसका सांस्कृतिक मूल्य था- द्विशरः नाभिसंधत्ते रामो द्विर्नाभिभाषे. इसके दो जबानें नहीं हैं, यह दो मुंहा नहीं है. राजनीति तो हमेशा दो मुँही होती है. जिसके एक मुँह है, उसके लिए कहा जाता है कि वह राजनीति ही नही जानता. बंगाल में बंकिम चंद चटर्जी ने एक गर्दभ स्रोत लिखा है, जिसमें ऐतिहासिक मूर्खों की सूची दी है. उस सूची में राजा दशरथ का भी नाम है. उसने एक दफा धोखे में कैकेयी को दो वरदान दे दिये. वह अपने वरदान को बदल नहीं सका. ऐसा बेवकूफ है राजा दशरथ. बंकिम बाबू ने लोक रहस्य में गधों में उनका नाम गिनाया है. दूसरे एक प्रसिद्ध नेता ने भी गधों की एक सूची तैयार की है. उसमें हरिश्चंद, दशरथ, राम आदि के नाम एक के बाद एक आये हैं. अंतिम नाम गांधी का है. ऐसा उन्होंने क्‍यों कहा? द्विःशरं नाभिसंधते. इसके दो मुंह नहीं हैं, इसलिए इसके एक बाण में शक्ति है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

किसी आदर्शों के लिए कार्य करके आपका नैतिक मूल्य बढ़ता है- महात्मा गांधी

पैसे की बात अपने दिल से बिलकुल निकाल दीजिये. यदि आप सच्चे ध्येय के प्रतिनिधि हैं, तो पैसा आपके पीछे पीछे दौड़ा चला आयेगा. सच्चे स्त्री और पुरुष पैसे की कठिनार्इ के कारण कभी पीछे नहीं हटते, यदि उनका ध्येय और उनके साधन दोनों उचित हों, विश्व भारती सच्चे प्रतिभाशाली और विद्वान लोगों को आकर्षित नहीं कर सकेगी. यदि वह भौतिक साधनों के बल पर अथवा उनसे मिलने वाले भौतिक आकर्षणों पर आधार रखेगी. उसका आकर्षण नैतिक होना चाहिए. प्रत्येक मनुष्य से उसके सामर्थ्य के अनुसार काम लिया जाये, और प्रत्येक मनुष्य को उसकी आवश्यकतानुसार दिया जाये, यह सामान्यतः सही सिद्धांत है. परंतु इससे आप प्रचलित बाजारू मूल्यों से आगे नहीं जा सकते. आप विश्वभारती के सदस्य इसलिए नहीं हैं कि उससे आपको भौतिक सुविधायें मिलती रहें. परंतु इसलिए है कि उसके आदर्शों के लिए कार्य करके आपका नैतिक मूल्य दिनोंदिन बढ़ता है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

दूसरी सब बातें ठीक हैं, परंत आप में कोर्इ न कोर्इ खराबी हैं- महात्मा गांधी

 

जब आप मुझसे यह प्रश्न पूछते हैं तो मैं निराश हो जाता हूं. जब आप यह देखते हैं कि आपके शिष्य श्रद्धाहीन हैं, मुझे अनेक बार ऐसा अनुभव हुआ है और हर बार इस बात की प्रतीति मेरे लिये स्नान जैसी ताजगी लाने वाली सिद्ध हुर्इ है. गुरुदेव की बौद्धिक परम्परा तो यहां अच्छी तरह सुरक्षित रखी जा रही है, परंतु मुझे डर है कि वे जिस आदर्शवाद के प्रणेता थे, उसके लिए यहां पूरी गुंजाइश नहीं है. इसका उपाय क्‍या है? मैं इतना कह सकता हूं कि मैं तो सही रास्ते पर हूं, परंतु संस्था में कुछ न कुछ खराबी है, यह वृत्ति आत्मसंतोष प्रकट करती है. यह घातक वृत्ति है. जब आप अपने मन में यह समझें कि आप स्वयं सब तरह से ठीक हैं, परंतु आपके चारो ओर खराबी ही खराबी है, तब आपको अपने लिए यह निष्कर्ष निकालना चाहिए कि दूसरी सब बातें ठीक हैं, परंतु आप में कोर्इ न कोर्इ खराबी है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

नेताओं का स्वागत करने वाली भीड़ अधिक अनुशासनबद्ध होनी चाहिए- महात्मा गांधी

 

यह अनियंत्रितता स्वराज्य के आगमन की सूचक नहीं है. वह अहिंसा की निशानी भी नहीं है. नेताओं का स्वागत करने के लिए लोगों की भीड़ तो होनी चाहिए, परंतु वह शांतिपूर्ण, गौरवयुक्‍त और बिलकुल अनुशासनबद्ध होनी चाहिए. मैंने साधारण सैनिकों को – चाहे वे कूच कर रहे हों या आराम कर रहे हों – हजारों की संख्या में पूरी खामोशी रखते देखा है. हमारे जनसमूह यदि स्वराज्य के अहिंसक सैनिक हैं, तो उन्हें साधारण सैनिकों से अधिक अनुशासनबद्ध होना चाहिए.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

सामूहिक प्रार्थना मानवों में वास्तविक एकता स्थापित करने का एक साधन- महात्मा गांधी

सामूहिक प्रार्थना सामान्य पूजा के द्वारा मानवों की वास्तविक एकता स्थापित करने का एक साधन है. सामुदायिक रूप में रामधुन गाना और ताल देना अहिंसा में वैसे ही अनुशासन के अंग हैं, जैसे सैनिक अनुशासन में शारीरिक कवायद और हथियारों की तालीम है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

र्इश्वर की शरण लेने पर राजनीतिक गुलामी नहीं रह जाती- महात्मा गांधी

यदि चालीस करोड़ भारतीय एक स्वर में बोल सकें, एक साथ चल सकें और एक होकर काम कर सकें, तो स्वतंत्रता उनके हाथ में आयी हुर्इ चीज समझिये. प्रार्थना मनुष्यों को बांधने वाली सबसे बड़ी शक्ति है और उसने मानव परिवार में संगठन तथा एकता पैदा की है. यदि कोर्इ व्यक्ति प्रार्थना के द्वारा र्इश्वर के साथ एकता स्थापित कर लेता है, तो वह सबको अपने जैसा ही समझेगा. तब कोर्इ मनुष्य ऊंचा और कोर्इ नीचा नहीं होगा. संकीर्ण प्रांतवाद न होगा और छोटी छोटी प्रतिस्पर्धायें न रहेंगी. यदि र्इश्वर के साथ हम एकराग हो जाते हैं, तो सभा कितनी बड़ी क्‍यों न हो, उसमें पूर्ण शांति और व्यवस्था रहेगी और कमजोर से कमजोर भी पूर्ण सुरक्षितता का अनुभव करेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि र्इश्वर साक्षात्कार से सारे भौतिक भय भाग जाते हैं. र्इश्वर की शरण स्वीकार कर लेने के बाद राजनीतिक गुलामी नहीं रह सकती. दासों के लिए मोक्ष नहीं होता.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

सामुदायिक प्रार्थना का असर- महात्मा गांधी

सामुदायिक प्रार्थना का लोगों पर जादू सा असर हो रहा है. मैं उसे रोज देख रहा हूं. प्रार्थना में भीड़ हजारों की नहीं, कभी कभी तो लाखों की होती है. फिर भी प्रार्थना के समय पूरी व्यवस्था और पूरी शांति रहती है. कोर्इ धक्‍कम धक्‍का या शोरगुल नहीं होता. यह बिलकुल नया अनुभव है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

भारतीयों की निडरता- महात्मा गांधी

एक समय था जब किसी को अखबार पढ़ने नहीं दिया जाता था. लेकिन आज हम अपने अफसरों से जाकर कहते हैं कि हम अपने सबसे बड़े नेता से मिलने जा रहे हैं और कोर्इ हमें रोकने की हिम्मत नहीं करता है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

नेता सुभाषचंद्र बोस की अनोखी सेवा- महात्मा गांधी

मैं जानता हूं कि सेना के सभी विभागों में आज एक नया जोश और नर्इ जागृति आ गयी है. इस परिवर्तन का बहुत कुछ श्रेय नेताजी बोस को है. मुझे उनकी कार्य पद्धति पसंद नहीं है. परंतु भारतीय सैनिकों को एक नर्इ दृष्टि और एक नया आदर्श देकर उन्होंने भारत की अनोखी सेवा की है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

विजय की प्रतीति के मद में सत्ताधारी लापरवाह हो गये हैं – महात्मा गांधी

ऊपर से नीचे तक सारी व्यवस्था भ्रष्ट हो गयी है. सरकारी गैर सरकारी भ्रष्टाचार पर – प्रजाजनों के भ्रष्टाचार पर ऑंखें बंद कर लेती है. यदि सरकार पर राष्ट्र का नियंत्रण होता, तो इस पाशविक घूसखोरी और भ्रष्टाचार को एक दिन के लिए भी सहन न किया जाता. इसकी तुलना में कोर्इ उदाहरण नहीं मिल सकता है तो वह क्‍लाइव और वारेन हेस्टिंग के युग में ही मिल सकता है. इस समस्या को जनता की विश्वस्त राष्ट्रीय सरकार ही हल सकती है. परंतु आज तो ऐसी कोर्इ सम्भावना दिखायी नहीं देती. विजय की प्रतीति के मद में सत्ताधारी लापरवाह हो गये हैं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं नहीं चाहता कि लोग शांत और स्थिर होकर बैठ जायें- महात्मा गांधी

मैं नहीं चाहता कि आप और दूसरे कोर्इ किसी कार्य में शांत और स्थिर होकर बैठ जायें. सैनिकों नागरिकों और सत्य की इस त्रिविध भयंकर हत्या के बीच किसी भी कार्य में स्थिर होकर बैठना असम्भव है. शरीर और आत्मा दोनों कूच हमें अथक रूप से जारी रखनी होगी. मेरा काम यह है कि मैं अपने को और आसपास वालों को जाग्रत कर दूं और मिथ्या आत्मसंतोष की स्थिति से बाहर निकाल दूं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

भूख पीड़ा जाने बगैर मैं लाखों लोगों से कैसे एकाकार हो सकता हूं- महात्मा गांधी

आज लाखों आदमी निष्क्रिय लाचार से भूख की पीड़ा भोग रहे हैं. इस कष्ट का छोटा सा अंश भी स्वेच्छा से और समझबूझ कर सहन किया जाय, तो स्थिति में काया पलट हो सकता है. यह उपवास किये बिना और खुद यह जाने बिना कि भूख की पीड़ा कैसी होती है, मैं इन लाखों लोगों के साथ कैसे बात कर सकता हूं या उनके साथ कैसे एकाकार हो सकता हूं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं र्इश्वर के आदेशानुसार काम करता हूं- महात्मा गांधी

आश्चर्य की बात यही है कि अभी मैं जीवित हूं और जीने का आनंद अनुभव कर सकता हूं. यह मैं इसलिए कर सकता हूं कि मुझे आनंद मालूम है. मैं यह जानता हूं कि सुख और दुख एक ही सिक्‍के के दो पहलू हैं. इसलिए मुझ पर दोनों का ही असर नहीं होता और र्इश्वर के आदेशानुसार मैं काम करता हूं. मैं धधकती आग के बीच पड़ा हूं और प्रायः अपने मन में गुनगुनाया करता हूं कि जगदाधार ने मेरे लिए अपने द्वार खोल दिये हैं, मुझे तुझमें समा जाने दे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं अराजकता और अव्यवस्था नहीं चाहता- महात्मा गांधी

मैं अराजकता और अव्यवस्था नहीं चाहता. अतः मुझे अराजकता के लिए नहीं, परंतु व्यवस्थितता के लिए काम करना चाहिए. यदि इस प्रयत्न में अराजकता मेरे रास्ते में आ जाये, तो मैं उससे विचलित नहीं होऊंगा. जापानियों के जीवन की उपेक्षा करने वाली बहादुरी से दुनिया रोमांच का अनुभव कर रही है. इस अवसर पर यदि जंगल के कानून के स्थान पर प्रेमधर्म की स्थापना करनी है, तो अहिंसा से जापानियों की अपेक्षा कहीं अधिक साहस और शौर्य की आशा रखी जाती है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मेरा संकल्प बल- महात्मा गांधी

आत्म निरीक्षण करने के लिए मैं अकसर अपने आप से पूछता हूं कि अपना मिशन सिद्ध करने के लिए मैं अपने शरीर पर जो भयंकर जोर डालता हूं, वह मेरे संकल्प बल का चिह्न है या र्इश्वर की कृपा का. इसकी कसौटी यह हैः यदि इस भार के नीचे मैं दब जाऊं, तो कहना चाहिए कि वह मेरे संकल्प बल, मोह या आतुरता का परिणाम था. लेकिन यदि मेरा परिश्रम केवल र्इश्वरेच्छा से हुआ है, तो उसकी कृपा मेरे साथ रहेगी और मैं इस तनाव को सहन कर लूंगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

बापू के अत्यधिक आध्यात्मिकपन में कुछ भयंकर बात है- राजाजी

बापू के अत्यधिक आध्यात्मिकपन में कुछ भयंकर बात है. एक हद तक तो महानता के साथ यह वस्तु अविच्छिन्न रूप से जुड़ी हुर्इ है. परंतु इसे कम करने के लिए कुछ न कुछ जरूर किया जाना चाहिए. उनके कार्य और स्वरूप के क्षेत्र में बुनियादी परिवर्तन की जरूरत है. आगे से उनका कार्य इंजन चलाने वाले का न होकर मार्ग दिखाने वाला होना चाहिए. उन्हें दिशा बता देनी चाहिए. नये नये विचार देने चाहिए और नैतिक और आध्यात्मिक प्रभाव फैलाना चाहिए. मैं मानता हूं कि हमें भविष्य में उनके पथ प्रदर्शन की कितनी जरूरत होगी, इसकी आज हम कल्पना भी नहीं कर सकते.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

अपने भीतर का सारा मैल हम धो डालें – महात्मा गांधी

बड़े दिन के एक छोटे संदेश में गांधीजी ने आश्रमवासियों से कहा कि हम सर्वधर्म समभाव मानने वाले लोग हैं, इसलिए हमें ऐसे तमाम अवसर जरूर मनाने चाहिए. हम अन्तर्मुख बनें, आत्म निरीक्षण करें. अपने भीतर का सारा मैल हम धो डालें और र्इश्वर की एकता और उसके आदेश की मूलभूत समानता का अनुभव करें.  जिसे हम सच्चा तथा न्यायपूर्ण मानते हैं, उसके लिए अपने प्राण भी न्यौछावर करने को तैयार रह कर हमें अपनी श्रद्धा का प्रमाण देना चाहिए. इस अवसर पर हमको यह बात याद रखना चाहिए और उसका मनन करना चाहिए कि र्इसा जिसे सत्य समझते थे, उसी के लिए वे सूली पर चढ़े थे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं स्त्री होता तो ऐसा नहीं करता – महात्मा गांधी

भारत की स्त्री पर यह बचपन से यह संस्कार डाला जाता है कि वह या तो अपने पति के साथ सुरक्षित है या चिता पर. उन्होंने लुर्इ फिशर से कहा कि कोर्इ भी स्त्री अपनी लाज बचाने वाले पुरुष या स्त्री के लिए गौरव का अनुभव करती है. मैं स्त्री होता तो ऐसा नहीं करता. यदि मैं अपनी लाज नहीं बचा सकती, तो तुम मेरी लाज बचाने वाले कौन होते हो? सीता ने ऐसा ही किया था, उन्होंने हनुमान को भी अपनी लाज बचाने नहीं दी. उनकी शुद्धता स्वयं एक बड़ी शक्ति थी, उनका मुख्य शस्त्र थी.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

स्वतंत्रता तभी मिलेगी, जब हम अपने छोटे-मोटे स्वार्थ छोड़ देंगे- महात्मा गांधी

सरकार समझ गयी है कि हममें जो श्रेष्ठ लोग हैं, वे बातें तो जोर जोर से करेंगे, पर अपने आचरण से उन्हें झूठा साबित करेंगे. बड़े व्यापारी, पूंजीपति, उद्योगपति और दूसरे लोग सरकार के विरुद्ध बोलते और लिखते तो हैं, परंतु व्यवहार में वे सरकार की इच्छा का ही पालन करते हैं और उसके जरिये लाभ भी उठाते हैं- भले ही वह लाभ सरकार को पंचानवे प्रतिशत और उन्हें पांच प्रतिशत क्‍यों न मिले.  तमाम बड़े हितों ने एक स्वर में घोषणा की है कि भारत अपने भाग्य का स्वयं निर्माण करने के लिए अपनी चुनी हुर्इ राष्ट्रीय सरकार से कुछ नहीं चाहता और वह सरकार ब्रिटिश या दूसरे सभी विदेशी नियंत्रण से मुक्‍त होनी चाहिए. परंतु स्वाधीनता मांगने से नहीं मिलेगी, वह तो तभी आयेगी जब छोटे-बड़े सभी स्वार्थ उन टुकड़ों का मोह छोड़ने को तैयार होंगे. जो ब्रिटिश राज्य द्वारा भारत में मचार्इ जा रही लूट में ब्रिेटेन के साझेदार बनने से उन्हें प्राप्त होते हैं. जब तक यह साझेदारी अबाधित रूप से चलती रहेगी, तब मौखिक विरोध से कुछ भी होना जाना नहीं है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं किसी भी मामले में राज्य की तरफ से फांसी दिये जाने के विरुद्ध हूं – महात्मा गांधी

मैं किसी भी मामले में राज्य की तरफ से फांसी दिये जाने के विरुद्ध हूं. लोगों ने आठ अगस्त उन्नीस सौ बयालिस को तथा उसके बाद जो कुछ किया, वह उत्तेजना की स्थिति में किया था. अगर इस समय ये फांसियां दी जायेगी, तो यह निर्दयतापूर्वक और जान-बूझकर किया हुआ खून और उससे भी अधिक भयंकर वस्तु सिद्ध होगी. क्‍योंकि यह विधिवत किया जायेगा और तथाकथित कानून के नाम पर किया जायेगा. इस घटना के कारण पहले से ही मौजूद दुखदायी कटुता में अतिशय वृद्धि होने के सिवा और कुछ नहीं होगा. मैं हृदय से चाहता हूं कि इन फांसियों का विचार छोड़ दिया जाये.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं महात्मा नहीं हूं- महात्मा गांधी

मैं उत्तम कोटि का महात्मा नहीं हूं – वास्तव में तो महात्मा ही नहीं हूं. परंतु मैं इतना जानता हूं कि मैं एक वत्सल पिता हूं और इसलिए मेरा हृदय आपके जैसी वात्सल्यमयी माता की तरफ अपने आप दौड़ जाता है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं यूरोपियन मानस को अच्छी तरह जानता हूं- महात्मा गांधी

मैं यूरोपियन मानस को अच्छी तरह जानता हूं. जब उसे विशुद्ध न्याय और स्वार्थ के बीच चुनाव करना पड़ेगा, तो वह स्वार्थ की ओर झपटेगा. अमरीका का साधारण मनुष्य भी बहुत स्वतंत्र विचार नहीं करता. रूजवेल्ट जो कहेंगे, उस पर वह विश्वास कर लेगा. रूजवेल्ट उसे बाजार देते हैं, उधार पूंजी देते हैं और दूसरी ऐसी अनेक चीजें देते हैं. इसी तरह चर्चिल अंग्रेज श्रमजीवी वर्ग से कह सकते हैं कि उन्होंने साम्राज्य रूप से टिकाये रखा है और उसके लिए विदेशी बाजार भी सुरक्षित कर दिये हैं. ब्रिटेन के लोग हमेशा की तरह उनके पीछे चलेंगे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मेरा यह विश्वास है कि मानव स्वभाव सदा ऊंचा उठता रहा है – महात्मा गांधी

मेरा यह विश्वास है कि मानव स्वभाव सदा ऊंचा उठता रहा है. इसलिए मैं मानव स्वभाव के भविष्य के बारे में कभी निराशावादी विचार नहीं रख सकता. यदि पांच महासत्तायें यह कहें कि हमारे पास जो कुछ है, उसे तो हम रखेंगे ही- तो परिणाम एक भयंकर विपत्ति होगी और फिर तो संसार का और पांच महासत्ताओं का भगवान ही मालिक है. फिर दूसरा अधिक संहारक युद्ध होगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

जब कोर्इ स्थिति मेरे सामने पैदा होती है, तब उसका हल मुझे सूझ जाता है- महात्मा गांधी

जब कोर्इ स्थिति मेरे सामने पैदा होती है, तब उसका हल मुझे सूझ जाता है. मैं ऐसा आदमी नहीं हूं, जो एकांत में बैठ कर समस्याओं पर विचार करता हो. मैं कर्मयोगी मनुष्य हूं. कोर्इ परिस्थिति मेरे सामने खड़ी होती है, तो उसमें व्यवहार की दिशा मुझमें अपने आप स्फुरित होती है. तर्क किसी घटना के पीछे नहीं किन्तु बाद में आता है. मैं जानता हूं कि जिस क्षण मैं संधि परिषद पहुंचूगा उसी क्षण उपयुक्‍त वाणी मुझे सूझ जायेगी. परंतु इतना मैं जरूर कह सकता हूं कि वहां मैं जो कुछ कहूंगा, वह युद्ध की दृष्टि से नहीं, परंतु शांति की दृष्टि से कहूंगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

हां, मैं व्यवहारिक आदर्शवादी होने का दावा करता हूं – महात्मा गांधी

हां, मैं व्यवहारिक आदर्शवादी होने का दावा करता हूं, जिस हद तक सिद्धांतों का बलिदान न करना पड़े, उस हद तक मैं समझौते में विश्वास करता हूं. मैं जैसी विश्व सरकार चाहता हूं, वह शायद आज भी मुझे न मिल सके. परंतु यदि वह सरकार वैसी हुर्इ, जो मेरे आदर्श को स्पर्श कर सके, तो मैं समझौते के रूप में उसे स्वीकार कर लूंगा. इसलिए यद्यपि मैं विश्व संघ पर मोहित नहीं हूं, फिर भी यदि वास्तव में अहिंसात्मक आधार पर बना, तो मैं उसे स्वीकार करने को तैयार रहूंगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

खून से सनी मिट्टी और सरदार भगतसिंह

भारतवासियों द्वारा सरदार भगतसिंह का नाम आज बड़ी श्रद्धा से लिया जाता है. उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए तत्कालीन युवकों के मन में देशभक्ति का संचार किया. जब वे मात्र बारह वर्ष के थे, तभीं जालियांवाला बाग हत्याकांड हुआ. भगतसिंह उस जगह पर गये, और खून से सनी मिट्टी एक शीशी में भर कर ले लाये. तब से वे लगातार उस मिट्ठी को देखते और जनरल डायर की उस करतूत को याद करते रहते. इसी कारण उन्होंने अपना पूरा जीवन आजादी की बलिवेदी पर चढ़ा दिया.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

यदि मेरी कल्पना की कांग्रेस और लीग की मिश्र सरकार बने, तो मैं उसका स्वागत करूंगा- महात्मा गांधी

यदि मेरी कल्पना की कांग्रेस और लीग की मिश्र सरकार बने, तो मैं उसका स्वागत करूंगा. यदि कांग्रेस और लीग मिलकर संसदीय कार्य करें, तो मुझे अच्छा लगेगा. परंतु इसके लिए आपको कार्य समिति से सत्ता प्राप्त करनी चाहिए. यह सत्ता प्राप्त किये बिना कोर्इ समझौता कर लेने में मुझे खतरा दिखायी देता है. लीग को कांग्रेस कार्य समिति की रिहार्इ कराने में प्रयत्न में शामिल होना चाहिए.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

यदि मुस्लिम लीग का रवैया न बदला तो मैं लीग के साथ कोर्इ समझौता नहीं करुंगा- महात्मा गांधी

 

मौनवार होने के कारण महात्मा गांधी ने भूलाभार्इ को उन्नीस सौ पैतालिस में एक पत्र लिखा- हमारे चारो ओर जो घटनायें हो रही हैं, उन पर विचार करने से मुझे मुस्लिम लीग के साथ सम्बंध जोड़ने से खतरा दिखायी देता है. इतना तो स्पष्ट है कि कांग्रेस कार्यसमिति की मुक्ति और उसकी स्वीकृति के बिना कांग्रेस के नाम पर कुछ नहीं किया जा सकता है. यह भी उतना ही स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि यदि आष्टी और चिमूर के कैदियों को फांसी दे दी गयी तो सारी बात बिगड़ जायेगी. यदि लीग का रवैया न बदला और वह भी किसी सौदेबाजी के बिना, तो कांग्रेस कार्यसमिति की स्वीकृति मिलने पर भी मैं लीग के साथ कोर्इ समझौता नहीं करूंगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

महात्मा गांधी ने वातानुकूलित रेल के डिब्बे में यात्रा नहीं की

शिमला सम्मेलन में कोर्इ बाधा उत्पन्न न हो, इसलिए महात्मा गांधी को शिमला आने के लिए आमंत्रित किया गया. उसकी यात्रा के लिए वातानुकूलित डिब्बे का प्रबंध किया गया था. किन्तु महात्मा गांधी ने उसमें यात्रा करने से इंकार कर दिया. उस यात्रा के दौरान यूनाइटेड प्रेस ऑफ अमेरिका के पत्र प्रतिनिधि श्री प्रेस्टन ग्रोवर भी थे. उन्हें गांधीजी  स्वास्थ्य की चिंता हो रही थी. इसलिए रास्ते में जब गाड़ी एक जगह रुकी, तो उन्होंने एक छोटा सा पर्चा लिख कर महात्मा गांधी को लिख कर दिया कि क्‍या तीसरे पहर के लिए आप कांग्रेस के अधिक ठंडे डिब्बे में यात्रा करें, यह अधिक बुद्धिमानी की बात नहीं होगी? इससे थोड़ी देर आप आराम कर सकेंगे. आपको चौबीस घंटे में जरा सी भी नींद आयी है. रास्ते के स्टेशनों पर आपकी नींद में बाधा पड़ने के कारण आप थके-मादे शिमला पहुंचेंगे, तो इससे आपको कोर्इ लाभ नहीं होगा. जैसे हम लोग अमेरिका में कहते हैं कि अपने आपको थोड़ा आराम दीजिये. महात्मा गांधी ने उनके ममताभरे पत्र के लिए धन्यवाद दिया. और कहा कि मुझे इस स्वाभाविक गर्मी में पिघल जाने दीजिये. भाग्य की तरह यह भी निश्चित है कि इस गर्मी के बाद ताजगी लाने वाली ठंडक आयेगी और उसका आनंद मैं लूंगा. मुझे सच्चे भारत का थोड़ा स्पर्श अनुभव करने दीजिये.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

शिमला सम्मेलन में महात्मा गांधी के न सम्मिलित होने के कारण

 

वाइसराय इस बात के लिए बहुत उत्सुक थे कि गांधीजी इस सम्मेलन में प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित हों. परंतु गांधीजी मानते थे कि इस तरह के प्रतिनिधि सम्मेलन में ऐसे किसी व्यक्ति का – फिर वह कितना ही बड़ा क्‍यों न हो – कोर्इ स्थान नहीं हो सकता, जो प्रतिनिधि न हो. उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक दृष्टि से यह सही चीज होगी कि उन्हें छोड़ दिया जाये. परंतु यदि उनकी सलाह की जरूरत हो तो दर्शक के रूप में वह सम्मेलन में उपस्थित भी रहेंगे. वाइसराय यही चाहते थे कि सम्मेलन के दौरान महात्मा गांधी शिमला में रहें. गांधीजी ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार लिया और राजकुमारी अमृतकौर के निवास स्थान पर अगले तीन सप्ताह तक रहे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

जिन्ना का गांधीजी पर आरोप

शिमला सम्मेलन के दौरान जब जिन्ना को यह पता चला कि गांधीजी इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं, तो उन्होंने गांधीजी पर यह आरोप लगाया कि गांधीजी सम्मेलन से हट गये. उनके इस आरोप का जवाब गांधीजी ने प्रेस्टन ग्रोवर को इस प्रकार दिया – यदि जिन्ना साहब मुझे वहां चाहते हैं तो मुझे ले जा सकते हैं. उनकी ओर से ऐसी चेष्टा का अर्थ होगा कि सम्मेलन के सामने जो मतभेद और कठिनाइयां हैं, उसके बावजूद वे समझौता चाहते हैं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

शिमला सम्मेलन बीमारों की कवायद

 

शिमला सम्मेलन को बीमारों की कवायद कहा गया. क्‍योंकि उसके अधिकांश प्रतिनिधियों को करेंगे या मरेंगे आंदोलन के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया था. चौतीस महीने के कारावास के बाद वे मुक्‍त किये गये थे. अधिकांश नेता एवं कार्यसमिति सदस्य बीमार या बीमार जैसे लग रहे थे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

विवाह के तीन सूत्र- पद्‍मश्री भवरलाल जैन

 

जैन इरिगेशन एवं गांधी रिसर्च फाऊंडेशन के संस्थापक पद्‍मश्री भवरलाल जैन केवल एक सफल व्यवसायी ही नहीं, समाजवेत्ता भी हैं. समाज को बहुत करीब से देखते हैं, उसके संचालन के सूत्रों को पकड़ते हैं, अपनाने से पहले उसे अपने द्वारा निर्धारित कसौटी पर कसते हैं. इसके पश्चात अपने जीवन में अपनाते हैं और अन्य लोगों को अपनाने को प्रेरित करते हैं. प्रायः लोग भौतिक संसाधनों की चकाचौध में रिश्ते कर लेते हैं. लेकिन थोड़े ही दिनों के पश्चात से उन्हें पूरी जिंदगी रोना पड़ता है.

उनका एक भरा-पूरा परिवार है. अपने परिवार की लड़कियों की शादी की और अपने लड़कों के लिए बहुएं लाये. आज सभी सुखी हैं, प्रसन्न हैं. अपने पारिवारिक उत्तरदायित्वों को अच्छी तरह निभा रही हैं. समाज के अन्य लोग भी उनके अनुकरण कर रहे हैं. शादी और विवाह के लिए पद्‌मश्री भवरलाल जी ने तीन सूत्र बताये हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. घराना- शादी या विवाह के समय लड़के या लड़की का घर नहीं, बल्कि उसका घराना देखना चाहिए. आलीशान घरों में रहने वाले सभी लोग सुखी नहीं हैं, यदि उनका घराना ठीक नहीं है तो शादी या विवाह सफल नहीं होगा.
  2. संस्कार- शादी या विवाह के अवसर पर लड़के या लड़की के संस्कार देखना चाहिए. यही वह चीज है, जो सुखी जीवन का आधार बन सकती है. यदि बहू या दामाद संस्कारित नहीं है, तो यह मान लीजिये वह रिश्ता सफल नहीं होगा. यदि निभ गया तो दोनों का गृहस्थ जीवन नीरस एवं कलहपूर्ण होगा.
  3. चरित्र- शादी या विवाह में तीसरी प्रमुख चीज चरित्र है. इसका ध्यान देना चाहिए. जिसका चरित्र उत्तम नहीं है, उसके पास सब कुछ होने के बावजूद भी रिश्ता नहीं करना चाहिए. अन्यथा अपने लड़के या लड़की को जानबूझ कर आग में ढकेलने की बात होगी. प्रायः लोग लड़के या लड़की के कद-काठी के चक्‍कर में पड़ जाते हैं. जबकि यह गौण है.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

 

पृथ्वी आग का गोला बन जायेगी

 

गरमी के मौसम की शुरुआत,

पृथ्वी का तापमान एकदम बढ़ना,

लू चलना, लोगों का तड़पना,

ताल-तलइयों का खौलना,

प्यास से पशु-पक्षियों का बिलखना,

पूरा दिन अपनी बिलों में काटना,

जमीनी तिनकों का झुलसना,

पेड़ों की नन्हीं कोपलों का मुरझाना,

इतनी गरमी प्रकृति भी नहीं सहन कर पाती है,

तेज आंधियों के साथ,

हर शाम बादलों का गुबार लेकर आती है,

अपनी नन्हीं- बड़ी बूंदों से पृथ्वी की प्यास बुझाती है,

पृथ्वी के हर छोटे बड़े पौधों को ठंडक पहुंचाती है,

रात में ऊमस, दिन में तपन से जूझ रही,

मानव जाति को समझाती है,

अभी तो यह झाकी है,

सारी गरमी बाकी है,

आगे आने वाले मौसम और गरम होंगे,

हर जीवधारी के लिए असह्य होंगे,

यदि अब भी नहीं चेते तुम,

तो एक दिन ऐसा आयेगा,

पृथ्वी आग का गोला बन जायेगी,

खुद तुम्हारा नामोनिशां मिटा जायेगी.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

महात्मा गांधी की पहली कर्नाटक यात्रा

8 मर्इ 1915 को गांधीजी पहली बार बंगलौर पधारे. उस समय यह राज्य मैसूर में था और यहां पर यदुवंशी ओडेयर राजाओं का शासन था. इस राज्य के प्रमुख नेताओं ने बंगलौर स्टेशन पर महात्मा गांधी का स्वागत किया. कुछ उत्साही स्वयं सेवकों ने उनसे कहा कि आपकी गाड़ी हम खींच कर ले जायेंगे. गांधीजी ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और पूछा कि गंतव्य स्थान यहां से कितनी दूर है. जब उन्हें मालूम चला कि सिर्फ आधे मील तो वे पैदल चल पड़े. उनकी इस सरलता से वहां की जनता आश्चर्यचकित रह गयी. इसी दिन शाम को लालबाग के ग्लास हाऊस में गांधीजी का अभिनंदन किया गया. अपने अभिनंदन का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक विशाल देश है. उसमें मैसूर एक श्रेष्ठतम रियासत है. आप लोग मैसूर में राम राज्य की स्थापना कीजिये.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

गोखले सार्वजनिक संस्था की स्थापना

 

महात्मा गांधी के प्रथम कर्नाटक आगमन के अवसर पर मैसूर के प्रख्यात साहित्यकार एवं मनीषी श्री डि. वि. गुंडप्पाजी ने गोखले नामक सार्वजनिक संस्था की स्थापना की. गांधीजी ने गोखले के चित्र  का अनावरण किया था.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

सौन्दर्य में बंगलौर प्रथम- महात्मा गांधी

 

सात जनवरी उन्नीस सौ चौतीस को महात्मा गांधी ने कहा कि कर्नाटक के लोग भाग्यशाली हैं. वे बंगलौर के सौंदर्य पर गर्व कर सकते  हैं. बंबर्इ को कोर्इ सुंदर नहीं कह सकता. वहा कुछ धनिकों के घर शायद अच्छे हैं. लेकिन आपका शहर बहुत अच्छा है. सौंदर्य में बंगलौर को प्रथम स्थान मिल सकता है.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

कर्नाटक के प्रमुख गांधीवादी नेता व प्रशंसक

 

  1. सर मिर्जा इस्माइल- मैसूर के तत्कालीन दीवान
  2. सर एम. विश्वश्वरैया- मैसूर के पूर्व दीवान
  3. माधवराव- दीवान
  4. सी. वी. रमण- नोबल पुरस्कार वैज्ञानिक
  5. श्रीमती गौरम्मा
  6. कार्नाड सदाशिवराव
  7. गंगाधरराव
  8. रंगनाथ रामचंद्र दिवाकर
  9. के. टि. भाष्यम

10. चेंगलराय रेड्डी

11. दासप्पा

12. निजलिंगप्पा

  1. 13.  भाष्यम रेड्डी

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

कर्नाटक ने मुझे गहने और निधि देने की परम्परा आरम्भ की है- महात्मा गांधी

 

कर्नाटक ने मुझे गहने और निधि देने की परम्परा आरम्भ की है. गहने देने के मामले में कोर्इ दूसरा प्रांत कर्नाटक की बराबरी नहीं कर सकता. कर्नाटक से जो मुझे मिला है, वह सब ठोस ही है. कर्नाटक में कभी कंजूसी नहीं दिखायी. उसने हमेशा पहला स्थान लिया है. कभी आपका दूसरा स्थान नहीं रहा. मुझे शक नही कि आज की स्थिति में आप लोगों ने अपनी शक्ति से ज्यादा ही काम किया है.

 

भारत के अन्य राज्यों से मैसूर आगे है- महादेव भार्इ देसार्इ

मैसूर राज्य भौगोलिक तथा आर्थिक रूप से बहुत ही सम्पन्न है. इसके अलावा, संस्कृति, शांति, विकास और प्रगतिपरक दृष्टिकोण में भारत के अन्य राज्यों से मैसूर आगे है. गांधीजी का कहना है कि ऐसे राज्य के सुंदर वातावरण में रहने के बाद में कृतज्ञता या आभार के कुछ शब्द कह देना काफी नहीं है. यह तो शुष्क औपचारिकता ही होगी.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

दिल्ली समझौता की धारा- 2

 

गांधी इरविन पैक्‍ट को दिल्ली समझौता भी कहते हैं. यह नाम दिल्ली में समझौता होने के कारण पड़ा. इसकी धारा- 2 में यह विधान किया गया है कि विधान सम्बंधी प्रश्न पर, सम्राट सरकार की अनुमति से यह तय हुआ है कि हिन्दुस्तान के वैध शासन की उसी योजना पर आगे विचार किया जायेगा, जिस पर गोलमेज कांफ्रेंस में पहले विचार हो चुका है. वहां जो योजना बनी थी, संघ शासन उसका एक अनिवार्य अंग है. इसी प्रकार भारतीय उत्तरदायित्व और भारत के हित की दृष्टि से रक्षा, वैदेशिक मामले, अल्पसंख्यक जातियों की स्थिति, भारत की आर्थिक साख और जिम्मेदारियों की अदायगी जैसे विषयों के प्रतिबंध या संरक्षण भी उसके आवश्यक भाग हैं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

धरती आपकी सारी थकान सोख लेती है- मगनलाल गांधी

 

कभी-कभी अपराह्न 2-3 बजे वे अपने डेस्क से उठते और प्रेस से दूर हरी घास में लोटने के लिए चले जाते. यदि हम कभी उनके पास जाते तो वे पूछते क्‍या काम है. और फिर स्वयं ही समाधान करने लगते. देखो, मुझे लिखते-लिखते झपकी आने लगी थी इसीलिए मैं यहां चला आया और घास में लोटने लगा. खुली जमीन पर लेटना बड़ा लाभदायक है. धरती आपकी सारी थकान सोख लेती है. वस्तुतः हमें धरती मां का बहुत उपकार मानना चाहिए. दस मिनट में वह हमें जितना तरोताजा बना देती है, उतना तीन घंटे की नींद से भी सम्भव नहीं है.

 

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मगनलाल मेरा उत्तराधिकारी- महात्मा गांधी

जिसे मैंने पूरी तरह अपना उत्तराधिकारी चुन लिया था, वह नहीं रहा. मेरे एक चाचा का पोता, मगनलाल उन्नीस सौ चार से मेरे साथ रहकर मेरे काम में हाथ बंटा रहा था. मगनलाल के पिता ने अपने सभी बेटे देशसेवा के लिए समर्पित कर दिये. दिवंतग मगनलाल इस मास के आरम्भ में सेठ जमनालाल जी तथा कुछ और लोगों के साथ बंगाल गया था. बिहार में अपने काम के दौरान वह तेज बुखार का शिकार हो गया और नौ दिन की बीमारी के बाद पटना ब्रजकिशोर प्रसाद की संरक्षात्मक देखभाल और अच्छी से अच्छी स्नेहमयी तथा कुशल तीमारदारी के बावजूद चल बसा.

मगनलाल धनोपार्जन की आकांक्षा लेकर उन्नीस सौ तीन में मेरे साथ दक्षिण अफ्रीका गया था. लेकिन उसने मुश्किल से एक साल भंडारण का काम किया होगा कि स्वेच्छा से निर्धनता का वरण करने के मेरे आकस्मिक आह्वान पर फीनिक्‍स आश्रम आ गया. एक बार मेरे पास आने के बाद उसके पंख न कभी लड़खड़ाये और न कभी उससे कोर्इ चूक हुर्इ. यदि उसने अपने आपको देशसेवा के लिए अर्पित न किया होता तो अपनी असंदिग्ध योग्यताओं और अथक परिश्रम के बल पर वणिक शिरोमणि बन गया होता. छापेखाने में लगा दिये जाने पर उसने सहज ही मुद्रण कला के रहस्यों पर अधिकार प्राप्त कर लिया. यद्यपि उसने पहले कभी औजार या मशीन को हाथ नहीं लगाया था. पर वह इंजन रूम, मशीन रूम और कंपोजीटर के डेस्क पर सहज रूप में काम करने लगा. उतनी ही सहजता से वह इंडियन ओपिनियन के गुजराती संस्करण का सम्पादन भी कर सकता था. फीनिक्‍स की योजना में चूंकि घरेलू खेती भी शामिल थी, इसलिए वह एक चतुर कृषक बना. मेरे खयाल से पूरे आश्रम में सबसे अच्छा बगीचा मगनलाल का ही था. उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद से प्रकाशित होने वाले यंग इंडिया के प्रथम अंक में श्रम के चिह्न परिलक्षित होते हैं, जिसकी उस समय बड़ी आवश्यकता थी.

उसका शरीर हट्टा-कट्टा था. जिसे उसने अपने अभीष्ट ध्येय की शीघ्र पूर्ति के लिए गला दिया. उसने मेरे आध्यात्मिक जीवन का निकटता से अध्ययन किया और उसका अनुसरण किया. जब मैंने सत्य की शोध में अपने साथियों, यहां तक कि विवाहित व्यक्तियों के लिए ब्रह्मचर्य को जीवन के नियम के रूप में अपनाये जाने के लिए प्रस्तुत किया, तो मगनलाल पहला व्यक्ति था, जिसने ब्रह्मचर्य पालन की सुंदरता और उसकी आवश्यकता को पहचाना. और यद्यपि मेरी जानकारी के अनुसार उसे इस व्रत के पालन में घोर संघर्ष करना पड़ा. लेकिन अंततः उसने इसमें सफलता प्राप्त की. इस प्रक्रिया में उसने अपनी पत्नी पर अपने विचार थोपे नहीं, अपितु उसे धैर्य पूर्वक तर्क के द्वारा राजी किया.

जब सत्याग्रह का जन्म हुआ तो वह उसकी अग्रिम पंक्ति में था. जब मैं दक्षिण अफ्रीका के संघर्ष को पूर्णतया व्यक्‍त करने वाले शब्द की खोज में था और किसी बेहतर अभिव्यक्ति के अभाव में मैंने अपर्याप्त ही नहीं, किन्तु किंचित भ्रामक शब्द सविनय अवज्ञा के प्रयोग की अनुमति दे दी थी, तो मगनलाल ने मुझे सही शब्द सुझाया. कितना अच्छा होता कि यदि मेरे पास वह सुंदर पत्र सुरक्षित होता जिसमें उसने इस संघर्ष के लिए सदाग्रह शब्द सुझाया था. जिसे मैंने थोड़ा बदल कर सत्याग्रह कर दिया. उसने अपने पत्र में इस संघर्ष के पीछे जो दर्शन है, उसका क्रमिक तर्क प्रस्तुत करते हुए पाठक को अपने प्रस्तावित शब्द को स्वीकार करने के लिए विवश किया था. जहां तक मुझे स्मरण है, मगनलाल का यह पत्र अत्यंत संक्षिप्त एवं तथ्यात्मक था, जैसे कि उसके पत्रादि सदा हुआ करते थे.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

मैं आश्रम का सबसे बड़ा पागल हूं- महात्मा गांधी

महात्मा गांधी ने प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के लिए डॉ. दिनशा मेहता के नेतृत्व में एक ट्रस्ट का निर्माण किया. उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट के द्वारा हम नम्रतापूर्वक यह बीज आपके हाथों में सौंपते हैं और भगवान से हार्दिक प्रार्थना करते हैं कि आपका पोषण पाकर वह प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय का रूप ग्रहण करे. हमें दृढ़ विश्वास है कि इस कार्य के पीछे भगवान का हाथ है. हम केवल उसकी इच्छा के साधन भर  हैं. इसे कोर्इ भावुकता कह सकता है, परंतु यह उन भावनाशील व्यक्तियों के स्वभाव के अनुकूल थी, जिन्हें गांधीजी अपने पास आकर्षित कर लेते थे. एक बार उन्होंने कहा था- सनकी, झक्‍की, पागल लोग मेरे आश्रम में चले आते हैं, और मैं उन सबसे बड़ा पागल हूं.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए मापदंड

 

इस सम्बंध में महात्मा गांधी ने कहा कि इसमें अमीरों को तभी लिया जायेगा, जब वे गरीबों के साथ रह सकें और इस संस्था में गरीबों को मिलने वाले स्थान और आराम से अधिक की आशा न रखें. यह आश्वासन दिया जायेगा कि स्वच्छता का मापदंड वैभव और विलासिता से दूर होने पर भी इस तरह की अन्य किसी भी संस्था में प्राप्त मापदंड के समान ऊंचे से ऊंचा होगा.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च फाऊंडेशन, जैन हिल्स, जलगॉंव, महाराष्ट्र

सम्पर्क-सूत्र- 09404955338, 09415777229

पत्राचार का पता- सी- 29, स्वराज्य नगर, पनकी, कानपुर- 208020, उत्तर प्रदेश

E-mail- dr.yadav.yogendra@gandhifoundation.net;             dr.yogendragand...

 

भिखमंगी राजनीति और महात्मा गांधी

अपनी स्थापना से लेकर सन्‌ 1920 तक कांग्रेस का ढंग निराला था. वह सिर्फ प्रस्ताव पास करती, उसे सरकार के पास भेजती और अखबारों के माध्यम से आंदोलन चलाती थी. तत्कालीन चिंतक आशुतोष चौधरी ने इसे भिखमंगी राजनीति का नाम दिया. महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन एवं सविनय अवज्ञा के माध्यम से कांग्रेस को इस राजनीति से बाहर निकाला. तब जाकर भारतीय राजनीति में एक निखार आया.

 

प्रो. डॉ. योगेन्द्र यादव

वरिष्ठ गॉंधीयन स्कालर

गॉंधी रिसर्च

Views: 201

Comment

You need to be a member of GANDHI IN ACTION network to add comments!

Join GANDHI IN ACTION network

Groups

Forum

Ahimsa. 5 Replies

My own finding is that first and foremost action in nonviolence (Ahimsa) is the personal aspect of turning to become a vegetarian. It is kind-of easy if not other-intentional to be non violent with…Continue

Started by JP Cusick in Ahimsa (non-violence). Last reply by Prof. Dr. Yogendra Yadav Mar 15, 2012.

THE END AND THE MEANS / AHIMSA OR "BY ALL MEANS NECESSARY" 2 Replies

    The statement in Gandhitopia News Digest of Nelson Mandela saying that his hero was not M.K.Gandhi but J.Nehru sounded to me almost as strange as if M.K.Gandhi had said "...my teacher was not…Continue

Started by Arthur Bogomil Burton in Gandhi and Vinoba Bhave. Last reply by Prof. Dr. Yogendra Yadav Mar 14, 2012.

NOT FROM THE THREE MONKEYS WHO COVER THEIR EYES, EARS AND MOUTH... 1 Reply

 SEVENTEEN SOCIAL SINS:wealth without WORKpolitics without PRINCIPLEScommerce without MORALITYeducation without CHARACTERpleasure without CONSCIENCEscience without HUMANITYworship without…Continue

Started by Arthur Bogomil Burton in Gandhi and Vinoba Bhave. Last reply by Prof. Dr. Yogendra Yadav Mar 14, 2012.

HAPPY THANKSGIVING!

  FROM Arthur Bogomil BurtonPEACE, LOVE AND BLESSINGS ALWAYS25 November 2010UNITED STATES OF THE INFINITE ONENESSOF THE INFINITE CONSCIOUSNESS OF THE INFINITEContinue

Started by Arthur Bogomil Burton in Gandhi and Vinoba Bhave Nov 25, 2010.

© 2019   Created by Sevak - network creator.   Powered by

Report an Issue  |  Terms of Service